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भागीराथपुरा कांड के बाद प्रशासन में भूचाल… इंदौर नगर निगम में एक साथ चार बड़े अधिकारियों के तबादले...

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✍️ संवाददाता: इंदाैर  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

2 जनवरी 2026

इंदाैर

इंदाैर। भागीराथपुरा की घटना कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी… वह शासन, प्रशासन और नगर व्यवस्था के बीच पनपती लापरवाही का ऐसा संकेत थी, जिसे अनदेखा करना सत्ता के लिए भी संभव नहीं था। जब जनता के बीच असंतोष उबाल पर पहुंचे और सवाल सड़कों से सचिवालय तक गूंजने लगें, तब शासन को हरकत में आना ही पड़ता है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश शासन ने इंदौर नगर निगम में अधिकारियों के तबादलों के रूप में पहला और स्पष्ट संदेश दिया है… कि व्यवस्था की अनदेखी अब महंगी पड़ेगी।


आज 2 जनवरी को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में नगर निगम इंदौर की प्रशासनिक संरचना को झकझोर दिया गया। वर्षों से एक ही दायरे में घूम रही फाइलों और जिम्मेदारियों को अचानक नई दिशाओं में मोड़ दिया गया। नगर निगम इंदौर के अपर आयुक्त रहे रोहित सिसोदिया को निगम से हटाकर शासन स्तर पर किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव बना दिया गया। यह केवल पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि शहरी अव्यवस्था की कीमत अब शासन स्तर तक चुकानी होगी।


इसी क्रम में जिला पंचायतों से दो अधिकारियों को सीधे शहरी रणभूमि में उतार दिया गया। जिला पंचायत खरगोन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहे आकाश सिंह और जिला पंचायत अलीराजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहे प्रखर सिंह को अपर आयुक्त बनाकर इंदौर नगर निगम भेजा गया। ग्रामीण प्रशासन की जमीन पर काम कर चुके इन अधिकारियों से अब शहर की अव्यवस्थाओं को संभालने की अपेक्षा की जा रही है… वह शहर, जो विकास के दावों में आगे है, लेकिन व्यवस्था के सवालों पर अक्सर कटघरे में खड़ा दिखता है।


इतना ही नहीं, परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारी आशीष कुमार पाठक को भी उप परिवहन आयुक्त के पद से हटाकर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। यह तबादला बताता है कि शासन अब विभागों के बीच दीवारें नहीं देख रहा… बल्कि समस्या जहां है, समाधान वहीं तलाशा जा रहा है। आदेश में यह भी साफ कर दिया गया है कि ये सभी पदस्थापन अस्थायी हैं… यानी यह अंतिम फैसला नहीं, बल्कि चेतावनी का पहला अध्याय है।


भागीराथपुरा की घटना ने शासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शहर केवल स्मार्ट सिटी के बोर्ड से नहीं चलते… शहर जवाबदेही, संवेदनशीलता और सक्रिय प्रशासन से चलते हैं। इन तबादलों के जरिए शासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंदौर नगर निगम अब प्रयोगशाला है… जहां व्यवस्था सुधरेगी या फिर अगला फैसला और कठोर होगा। अब प्रश्न केवल अधिकारियों के नाम बदलने का नहीं है… प्रश्न उस सोच का है, जो अगर नहीं बदली, तो हर भागीराथपुरा एक नई चेतावनी बनकर सामने आता रहेगा।

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