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पेटलावद–तारखेड़ी में सूखे तालाब, सूखती खेती… रबी फसल पर संकट, माही डैम से पानी की मांग, पलायन को मजबूर किसान...

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✍️ संवाददाता: झाबुआ / तारखेड़ी  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

04 जनवरी 2026

झाबुआ / तारखेड़ी

तारखेड़ी (चरणसिंह लववंशी)। झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र के तारखेड़ी और आसपास के कई गांवों में रबी फसल के लिए पानी की कमी अब सिर्फ समस्या नहीं, बल्कि किसानों के लिए रोज़मर्रा की जंग बन चुकी है। खरीफ सीजन में अधिक बारिश ने सोयाबीन की फसल बर्बाद कर दी और अब रबी में गेहूं व चने की बुवाई भी पानी के अभाव में खतरे में है। खेत सूख रहे हैं, उम्मीदें जवाब दे रही हैं और किसान असहाय महसूस कर रहे हैं।

पानी नहीं मिलने से गेहूं और चने की फसलें सूखने लगीं… छोटे और गरीब किसान सबसे ज्यादा प्रभावित… सिंचाई साधन नहीं होने से परिवार के सामने रोज़ी-रोटी का संकट…
इस पूरे क्षेत्र में सिंचाई का एकमात्र सहारा चेची तालाब है, जबकि गरवाखेड़ी तालाब पूरी तरह सूख चुका है। हालात यह हैं कि जिस चेची जलाशय की सिंचाई क्षमता 109 हेक्टेयर बताई जाती है, वहां आज 39 एकड़ भूमि को भी ढंग से पानी नसीब नहीं हो रहा। तालाबों में पानी कम होने से खेतों तक सिंचाई पहुंच ही नहीं पा रही।


खेत सूखे, घरों में चिंता...

किसानों का कहना है कि छोटे और गरीब किसानों के पास ट्यूबवेल जैसे साधन नहीं हैं। ऐसे में रबी की फसल न हो पाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों को मजबूरी में दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ रहा है। गांवों में महिलाएं भी रोजगार की तलाश में बाहर जाने को विवश हैं।


        भंवरलाल पटेल, हीरालाल, कैलाश, चंपालाल, भेरूलाल, महेश, गीता बाई, पप्पू और सरदार जैसे किसानों का कहना है कि क्षेत्र में सिर्फ खरीफ की फसल ही हो पाती है। रबी की फसल अगर समय पर पानी मिले तो अच्छी हो सकती है और इससे गांवों की आर्थिक हालत सुधर सकती है।


लाखों खर्च हुए, फिर भी तालाब बेकार....

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत तारखेड़ी मंदिर के समीप विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च कर तालाबों का निर्माण कराया गया, लेकिन लापरवाही के चलते किसानों को इनका लाभ नहीं मिला। तारखेड़ी और जूनापानी क्षेत्र का पुराना तालाब आज जलकुंभी से भरा पड़ा है। वर्षों से न तो उसकी सफाई हुई और न ही मरम्मत।

चेची तालाब में लगातार घटता जलस्तर… सिंचाई के अभाव में पेटलावद–तारखेड़ी क्षेत्र के किसानों की रबी फसल खतरे में… तालाब पर निर्भर दर्जनों गांवों में खेती चौपट होने की आशंका…

मई–जून में विभागीय अधिकारियों ने सर्वे कर पुराने और नए तालाबों की मरम्मत का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आज तक इस तालाब को किसानों के लिए उपयोगी बनाने कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई।


माही डैम से पानी की मांग...

किसानों की साफ मांग है कि माही डैम से सिंचाई के लिए पानी चेची तालाब में छोड़ा जाए, ताकि गेहूं और चने की फसल बचाई जा सके। किसानों का कहना है कि यदि समय-समय पर पानी मिल जाए तो खेती फिर से जीवन का सहारा बन सकती है।


पूर्व क्षेत्रीय सांसद प्रतिनिधि राजेश कसवा ने कहा कि वे इस संबंध में सिंचाई विभाग और माही डैम के अधिकारियों से चर्चा कर कार्रवाई की जानकारी देंगे। वहीं वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता एवं मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौर ने बताया कि माही डैम से नल–जल योजना के तहत पेयजल दिया जा रहा है और नहर से बड़ी पाइपलाइन के माध्यम से चेची तालाब में सिंचाई हेतु पानी लाने की संभावना पर बातचीत की जाएगी।


सिंचाई विभाग के अनुविभागीय अधिकारी देवेंद्र डावर का कहना है कि चेची तालाब में माही डैम का पानी लाने का निर्णय माही विभाग पानी की उपलब्धता के अनुसार करेगा, उसी आधार पर आगे की प्रक्रिया संभव है।


पानी मिला तो बदलेगा भविष्य...

सामाजिक कार्यकर्ता चरणसिंह लववंशी का कहना है कि सिंचाई पानी के अभाव में यह पूरा क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। यदि जल प्रबंधन सुधरे और तालाबों में नियमित पानी पहुंचे तो किसान नई तकनीक अपनाकर खेती को लाभ का धंधा बना सकते हैं। इससे न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि गांवों में खुशहाली लौट सकती है।


            फिलहाल खेतों में सूखती फसलें और तालाबों में घटता पानी प्रशासन से जल्द निर्णय और ठोस कदम की मांग कर रहा है, क्योंकि यहां पानी सिर्फ सिंचाई नहीं, किसानों की जिंदगी है।

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