भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा : 20 हजार की रिश्वत लेते शाखा प्रबंधक रंगे हाथ गिरफ्तार... धान खरीदी भुगतान में 10% कमीशन की मांग, लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप...
09 जनवरी 2026
भाेपाल
भाेपाल/सुहागपुर (संदीप चाैरसिया) । मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लोकायुक्त भोपाल की टीम ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, सुहागपुर के शाखा प्रबंधक दिनेश चंद्र दुबे को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बैंकिंग व्यवस्था में व्याप्त उस भ्रष्ट तंत्र को उजागर करती है, जहां शासकीय योजनाओं के भुगतान तक को कमीशन के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा रहा।
धान खरीदी के नाम पर अवैध वसूली का खेल...
पूरा मामला शासकीय समर्थन मूल्य पर की गई धान खरीदी से जुड़ा है। धान खरीदी के दौरान हम्मालों द्वारा किए गए कार्य का भुगतान समिति के माध्यम से किया जाना था। इस मद में लगभग 2 लाख रुपए का भुगतान लंबित था। आरोप है कि इस राशि को पास कराने के बदले शाखा प्रबंधक दिनेश चंद्र दुबे ने समिति प्रबंधक से 10 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की।
समिति प्रबंधक ने दिखाई हिम्मत, की शिकायत...
रिश्वत की इस खुली मांग से परेशान होकर समिति प्रबंधक कैलाश कुशवाहा ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय 1 जनवरी को लोकायुक्त भोपाल में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया कि बिना रिश्वत दिए भुगतान की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही है और लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
शिकायत की पुष्टि के बाद रची गई ट्रैप योजना...
लोकायुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले इसकी गोपनीय जांच और पुष्टि कराई। पुष्टि के बाद एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। तय रणनीति के अनुसार जैसे ही रिश्वत की राशि दी जानी थी, लोकायुक्त की टीम सक्रिय हो गई।
बैंक परिसर में रंगे हाथ गिरफ्तारी...

गुरुवार शाम लोकायुक्त की टीम सुहागपुर स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के परिसर में पहुंची। जैसे ही शाखा प्रबंधक दिनेश चंद्र दुबे ने समिति प्रबंधक से 20 हजार रुपए रिश्वत के तौर पर स्वीकार किए, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ दबोच लिया। बैंक परिसर में अचानक हुई इस कार्रवाई से कर्मचारियों और ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज...
लोकायुक्त भोपाल के डीआईजी मनोज सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त के निर्देशन में की गई है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। आरोपी से आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कौन-कौन रहा कार्रवाई में शामिल...
इस महत्वपूर्ण ट्रैप ऑपरेशन में पुलिस अधीक्षक बी.एम. द्विवेदी, निरीक्षक रजनी तिवारी, प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, मुकेश पटेल, आरक्षक मुकेश परमार और चेतन्य प्रताप सिंह की प्रमुख भूमिका रही।
सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न...
धान खरीदी जैसी किसान और मजदूर हित से जुड़ी योजना में रिश्वतखोरी का यह मामला सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जहां एक ओर सरकार पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर बिना “कमीशन” काम न होने की सच्चाई सामने आ रही है।





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