रायपुरिया ग्राम पंचायत की लापरवाही से मच सकता है बड़ा स्वास्थ्य संकट... मुख्य पेयजल कुएँ के पास शौचालय निर्माण...
09 जनवरी 2026
झाबुआ
झाबुआ। पेटलावद क्षेत्र की रायपुरिया ग्राम पंचायत एक बार फिर गंभीर लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत द्वारा नगर के मुख्य पेयजल स्रोत — झाबुआ रोड पुल के पास स्थित कुएँ से महज 50 से 60 मीटर की दूरी पर सुलभ शौचालय का निर्माण शुरू कर दिया गया है। यही नहीं, इसी कुएँ के सामने कुछ समय पहले नाले के भीतर मटन-मछली मार्केट की दुकानें भी तैयार कर दी गई थीं।
अब यह गंदगी जाएगी कहां...?

स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय और मटन-मछली बाजार से निकलने वाला अपशिष्ट और गंदा पानी सीधे रिसकर उसी कुएँ में पहुँचेगा, जिससे पूरे गांव को पीने का पानी सप्लाय होता है। यह कुआँ कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं, बल्कि वर्षों से पूरे रायपुरिया की जीवनरेखा रहा है।
दूषित पानी का खतरा, लेकिन पंचायत बेपरवाह...

प्रदेश में हाल ही में दूषित पेयजल से जानें जाने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, इसके बावजूद रायपुरिया में बिना किसी वैज्ञानिक सर्वे, बिना स्वास्थ्य विभाग की राय और बिना भूजल सुरक्षा मानकों के यह निर्माण कराया जा रहा है। यह स्थिति सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुला स्वास्थ्य खतरा मानी जा रही है।
क्या रायपुरिया को बनाया जा रहा है दूसरा भागीरथपुरा...?
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारियों की त्रासदी अभी लोगों के जेहन में ताजा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह निर्माण नहीं रोका गया, तो रायपुरिया भी उसी राह पर धकेला जा रहा है - जहां लोगों को मल-मूत्र और बाजार की गंदगी मिला पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा।
पूरे गांव का एक ही पेयजल स्रोत...
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि “पूरे गांव में इसी कुएँ से पानी सप्लाय होता है। पीढ़ियों से लोग इसी पानी पर निर्भर हैं...” ऐसे में कुएँ के आसपास इस तरह का निर्माण सीधे-सीधे ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
जिम्मेदार कौन...? पंचायत या प्रशासन...? 
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंचायत को नियमों की जानकारी नहीं...? या जिम्मेदार अधिकारी आँख मूंदकर सब देख रहे हैं...? यदि कल को कोई महामारी फैली, तो जवाबदेही किसकी होगी...?





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