मंत्री और मुख्यमंत्री के शहर में झोन कार्यालय के सामने कानून बौना...! मेडिकेयर हॉस्पिटल के अवैध निर्माण पर अब तक चुप क्यों है नगरीय प्रशासन...?
24 जनवरी 2026
इंदौर
इंदौर (अरविंद आर. तिवारी) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार भले ही अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती के दावे करती हो, लेकिन इंदौर शहर में उन्हीं दावों की सरेआम धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। यह मामला किसी दूरस्थ क्षेत्र का नहीं, बल्कि नगर निगम के झोन-10 कार्यालय के ठीक सामने स्थित मेडिकेयर हॉस्पिटल का है, जहां वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर निर्माण और संचालन किया जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग की चुप्पी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2009 में लाहोटी मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से डॉ. राजेंद्र कुमार हेतु अस्पताल का नक्शा स्वीकृत किया गया था। यह नक्शा जी प्लस 3 (G+3) यानी अधिकतम तीन मंजिल निर्माण के लिए पास हुआ था। नियमों के तहत एफएसआई, एमओएस और पार्किंग की स्पष्ट शर्तें भी तय की गई थीं।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। मौके पर मेडिकेयर हॉस्पिटल की इमारत छह मंजिल तक खड़ी दिखाई देती है। यह अंतर इतना बड़ा है कि इसे किसी तकनीकी भूल या कागजी गड़बड़ी कहकर नहीं टाला जा सकता। सवाल यह उठता है कि अतिरिक्त मंजिलें किस अनुमति से बनीं और निर्माण के दौरान नगर निगम का निरीक्षण तंत्र आखिर कहां था।
स्वीकृत नक्शे में अस्पताल के पूरे बेसमेंट को पार्किंग के लिए आरक्षित किया गया था। अस्पताल जैसी संवेदनशील संस्था में पर्याप्त पार्किंग अनिवार्य मानी जाती है, ताकि सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर दबाव न पड़े। इसके बावजूद मेडिकेयर हॉस्पिटल में बेसमेंट को पार्किंग के बजाय ब्लड बैंक, कैंटीन और कार्यालयों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह स्थिति न केवल भवन अनुमति का उल्लंघन है, बल्कि अग्नि सुरक्षा और आपात प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मानकों के लिए भी गंभीर खतरा मानी जा रही है। इसके बावजूद अब तक बेसमेंट को मूल स्वरूप में बहाल कराने के कोई ठोस आदेश सामने नहीं आए हैं।
लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह करने के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा ग्राउंड फ्लोर पर एक बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें पार्किंग को बेसमेंट की ओर दर्शाया गया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि बेसमेंट में एक-दो साइकिल के अलावा कोई वाहन नजर नहीं आता। इसे साफ तौर पर भ्रम फैलाने की कोशिश माना जा रहा है।
बेसमेंट में पार्किंग उपलब्ध न होने के कारण मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ के वाहन सड़क और फुटपाथ पर खड़े किए जा रहे हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि पैदल चलने वालों को भी मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ता है। कई बार आपात सेवाओं के लिए भी रास्ता संकरा हो जाता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा अव्यवस्थित दृश्य नगर निगम झोन-10 कार्यालय के ठीक सामने रोज़ देखा जा सकता है। इसके बावजूद न तो अवैध पार्किंग हटाई जा रही है और न ही अस्पताल प्रबंधन पर कोई सख़्त कार्रवाई की जा रही है।
भवन निर्माण नियमों के अनुसार अस्पताल परिसर में एमओएस यानी अनिवार्य खुला स्थान छोड़ा जाना आवश्यक होता है, ताकि हवा, रोशनी और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी संभव हो सके। मेडिकेयर हॉस्पिटल में यह एमओएस भी पूरी तरह कवर कर लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो कोई प्रभावी नोटिस जारी हुआ और न ही निर्माण हटाने की कार्रवाई दिखाई दी।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पास की मल्टियों में कुछ फ्लैट खरीदकर उनकी पार्किंग का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही है। आए दिन पार्किंग को लेकर विवाद होते हैं, रास्ता जाम रहता है और शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकलता।
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नक्शा उल्लंघन, बेसमेंट का दुरुपयोग, एमओएस खत्म होना और सड़क-फुटपाथ पर अतिक्रमण सब कुछ स्पष्ट है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। क्या अस्पताल प्रबंधन को किसी स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, या फिर निगम अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।
अब यह मामला स्थानीय स्तर से ऊपर उठ चुका है। नगरीय प्रशासन विभाग और सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि जी प्लस 3 की अनुमति पर छह मंज़िल निर्माण कैसे हुआ, बेसमेंट पार्किंग का व्यावसायिक उपयोग किसकी सहमति से चल रहा है और झोन कार्यालय के सामने हो रहे इन उल्लंघनों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अगर मुख्यमंत्री वास्तव में अवैध निर्माण के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर कायम हैं, तो इस मामले में स्वतंत्र जांच, अवैध मंज़िलों पर तत्काल कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं, प्रभावशाली संस्थानों के लिए नहीं।
एमपी जनमत इस मुद्दे को जनहित में लगातार उठाता रहेगा, क्योंकि जब झोन कार्यालय के सामने कानून कमजोर पड़ जाए, तो शहर में नियमों के पालन की उम्मीद करना बेमानी हो जाता है।





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