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घोटाला सामने… फिर भी चुप्पी क्यों? टंट्या मामा प्रतिमा प्रकरण से उठी आक्रोश की आग, सड़क पर उतरा आदिवासी समाज

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✍️ संवाददाता: खरगोन  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

25 जनवरी 2026

खरगोन

दो उपयंत्रियों का निलंबन ‘बलि का बकरा’ ? असली जिम्मेदार अब भी सुरक्षित...!

खरगोन (विशाल भमोरिया) । बिस्टान रोड नाके तिराहे पर स्थापित क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर उठे कथित घोटाले ने अब पूरे शहर में जनआक्रोश का रूप ले लिया है। धातु की प्रतिमा के नाम पर फाइबर की मूर्ति लगाए जाने और लाखों रुपये की राशि आहरित करने के आरोपों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सवाल साफ है - जब घोटाला सामने है, तो कार्रवाई कहाँ अटकी हुई है...?

 

धातु की प्रतिमा की मंजूरी के बावजूद फाइबर की मूर्ति और लाखों की राशि आहरण के आरोप। दो उपयंत्रियों के निलंबन के बाद भी असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं? सड़क पर उतरा आदिवासी समाज।

टंट्या मामा प्रतिमा खरीदी में कथित अनियमितताओं का मामला अब प्रशासनिक दफ्तरों से निकलकर सड़क पर आंदोलन में तब्दील हो चुका है। मंगलवार को जयस, आदिवासी समाज और कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन कर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।


धरना समाप्त होने के बाद शाम को प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पूरे मामले में दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि शासकीय धन के गबन और सुनियोजित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

 

खरगोन में टंट्या मामा प्रतिमा खरीदी को लेकर गंभीर आरोप। आदिवासी समाज की भावनाएं आहत, FIR और लोकायुक्त जांच की मांग के साथ तेज हुआ आंदोलन।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार नगर पालिका परिषद खरगोन द्वारा 15 नवंबर 2025 को टंट्या मामा चौराहे पर प्रतिमा स्थापित की गई थी। परिषद ने प्रस्ताव पारित कर धातु की प्रतिमा लगाने के लिए लगभग 10 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया और इसके लिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई थीं।


धरने के दौरान कसरावद विधायक सचिन यादव ने आरोप लगाया कि मौके पर धातु की जगह फाइबर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जबकि 9 लाख 99 हजार रुपये की राशि आहरित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे शासकीय धन का गबन और खुला भ्रष्टाचार बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


प्रशासन द्वारा दो उपयंत्रियों को निलंबित किए जाने को आंदोलनकारियों ने अधूरी और दिखावटी कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि जब पूरा निर्णय-प्रक्रिया नगर पालिका स्तर पर हुई, तो केवल इंजीनियरों पर कार्रवाई कर सीएमओ और नपाध्यक्ष की जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय क्रांतिकारी टंट्या मामा का अपमान हुआ है और आदिवासी समाज की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। यही कारण है कि समाज के लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए हैं।


जयस ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण में शामिल नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।


धरना स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। जयस ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


घोटाले के आरोप, फाइबर प्रतिमा और राशि आहरण के प्रयास सामने आने के बावजूद कार्रवाई पर बना सन्नाटा अब कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा, या वास्तव में दोषियों तक कार्रवाई पहुंचेगी...?

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