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मुख्यालय से गायब, रजिस्टर में हाजिर... आरोग्यम सेंटर की CHO बनी मनमर्जी की महारानी, निजी भ्रमण में मस्त

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✍️ संवाददाता: राणापुर  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

- जुलाई 26, 2025

राणापुर

✍ ऋतिक विश्वकर्मा

राणापुर ब्लॉक के ग्राम बन में पदस्थ आरोग्यम केन्द्र की समुदाय आधारित स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) प्रियंका डामोर इन दिनों सेंटर पर कम, मुख्यालय से बाहर ज़्यादा नज़र आती हैं - वो भी बिना किसी अनुमति के।

रजिस्टर में हस्ताक्षर... जमीनी हकीकत में गैरहाजिर...

स्थानीयों ने कई बार बताया कि सीएचओ जब मन आता है, तब सेंटर आती हैं। उपस्थिति रजिस्टर में साइन करके फुर्ती से निजी कार्यों पर निकल जाती हैं। कभी जिला मुख्यालय, तो कभी पेटलावद रोड पर पति संग घूमती हुई देखी जाती हैं।

बीपीएम ने किया कॉल, जवाब वही पुराना - "काल रिसीव नहीं किया गया..."

जब इस विषय में हमने ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (BPM) रीना अलावा से चर्चा की तो उन्होंने तत्काल CHO को कॉल किया - लेकिन कॉल उठाया ही नहीं गया। रीना अलावा ने पुष्टि की...

> "रजिस्टर में नाम है लेकिन व्यक्ति नदारद है। मुख्यालय छोड़ना वह भी बिना सूचना के, गंभीर लापरवाही है। नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।"

गांव में किया औचक निरीक्षण, मिली गायब CHO की 'हाजिरी'

जब हमारी टीम आरोग्यम केन्द्र, बन पहुँची, तो एएनएम और आशा कार्य में लगी मिलीं, लेकिन सीएचओ सिर्फ रजिस्टर में मिलीं - सेंटर पर नहीं।

स्थानीयों से पूछताछ में पता चला कि...
> "मैडम तो आज पेटलावद की ओर अपने पति संग घूमने गई हैं..."

हमने खुद कॉल किया - लेकिन जवाब फिर वही "काल रिसीव नहीं किया गया।"
बाद में उच्चाधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया।

बीएमओ उषा गेहलोत ने माना - लापरवाही है, कार्रवाई तय...

> "यह सीधी-सी बात है – कार्य में लापरवाही, सेवा शर्तों का उल्लंघन। हम कारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। यदि सुधार नहीं हुआ, तो वेतन रोका जाएगा और अनुशासनात्मक कार्यवाही भी संभव है।"
— डॉ. उषा गेहलोत, BMO राणापुर

अब कुछ जरूरी सवाल...

1. क्या सरकारी सेवा का मतलब है... घर बैठे तनख्वाह, मनमर्जी की नौकरी...?

2. क्या ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की ज़िम्मेदारी निभाना सीएचओ के कार्यक्षेत्र में नहीं आता?

3. और, क्या सिर्फ "रजिस्टर की हाजिरी" से ज़मीनी सेवा का न्याय हो जाएगा...?

मुद्दे की बात

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए हर साल करोड़ों खर्च कर रही है। पर जब ज़िम्मेदार अधिकारी ही फील्ड छोड़ निजी फुर्सत में रहें - तो फिर स्वास्थ्य सेवा का असली मर्ज़ यहीं है।

रजिस्टर में नाम, पर हकीकत में गायब...  स्वास्थ्य सेवा की हालत अब तो, हो गई नायब...

एमपी जनमत की टीम आगे भी इस मुद्दे पर नज़र रखेगी। क्योंकि जब बात जनसेवा की हो, तो हम सवाल उठाएंगे - हर स्तर पर...

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