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बीयर जब्ती केस में बड़ा कानूनी मोड़ : पुलिस की सख्ती के बाद कोर्ट से ट्रकों को मिली जमानत, अधिवक्ता योगेश खींची की प्रभावी पैरवी

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✍️ संवाददाता: धार  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

26 फरवरी 2026

धार

✍️ ऋतिक विश्वकर्मा | एमपी जनमत

धार/टांडा | राजगढ़–कुक्षी रोड स्थित ग्राम अम्बासोटी के पास टांडा थाना पुलिस द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई में जब्त 33 हजार लीटर से अधिक बीयर के मामले में अब नया कानूनी अध्याय जुड़ गया है। करोड़ों की जब्ती और आबकारी की गंभीर धाराओं के बीच अदालत से दोनों ट्रकों को जमानत मिलना इस प्रकरण का अहम मोड़ माना जा रहा है।

 

  कैसे हुई थी कार्रवाई?  

28 जनवरी 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दो ट्रकों MP 69 H 6121 और MP 09 HG 8900—को रोका। तलाशी में भारी मात्रा में “माउंट 6000” बीयर की पेटियां बरामद हुईं। कुल मात्रा लगभग 33,300 बल्क लीटर आंकी गई।

              एक चालक मौके से फरार हो गया, जबकि मांगीलाल चौहान निवासी पीथमपुर (जिला धार) को पुलिस ने गिरफ्तार किया। फरार आरोपी अजय चौहान निवासी बोर्झाड़ (जिला अलीराजपुर) की तलाश जारी है।

 

  धारा 34(2) में प्रकरण  

आरोपियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया, जो व्यावसायिक स्तर पर अवैध शराब परिवहन को गंभीर अपराध मानती है। जब्त बीयर और दोनों ट्रकों को थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया।

 

 अदालत में बदली तस्वीर, अधिवक्ता योगेश खींची की प्रभावी दलीलें 

मामला न्यायालय में पहुंचने पर वाहन स्वामियों की ओर से अधिवक्ता योगेश खींची ने सशक्त पैरवी की। केस डायरी के बिंदुवार परीक्षण और विधिक तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत दलीलों ने अदालत का ध्यान खींचा।

          माननीय न्यायालय ने प्रकरण की परिस्थितियों का अवलोकन करते हुए विधिसम्मत शर्तों के साथ दोनों ट्रकों की जमानत (सुपुर्दगी) स्वीकृत कर दी।

टांडा क्षेत्र में नाकेबंदी के दौरान जब्त दो ट्रकों के मामले में अदालत ने जमानत स्वीकृत की। अधिवक्ता योगेश खींची की प्रभावी पैरवी के बाद आबकारी प्रकरण में यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।

वैसे अधिवक्ता योगेश खींची पूर्व में भी कई चर्चित मामलों में प्रभावी परिणाम दिला चुके हैं। हाल ही में सादलपुर में जब्त डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की शराब के मामले में भी उनकी पैरवी के बाद वाहन सुपुर्दगी का आदेश हुआ था। अब 33 हजार लीटर बीयर जब्ती प्रकरण में ट्रकों की जमानत मिलने से एक बार फिर उनकी कानूनी रणनीति चर्चा में है।


वैसे एमपी जनमत से चर्चा के दाैरान इंदाैर हाईकाेर्ट के कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह के मामलों में वाहन सुपुर्दगी आदेश प्राप्त करना आसान नहीं होता, क्योंकि धारा 34(2) के प्रकरणों को गंभीरता से देखा जाता है। ऐसे में सुनियोजित और तथ्याधारित पैरवी निर्णायक भूमिका निभाती है।

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