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माछलिया छात्रावास में बालिकाओं की राशि पर संगीन खेल… अधिकारी, अधीक्षिका और संकुल प्राचार्य के बेटे की भूमिका सवालों में…

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✍️ संवाददाता: झाबुआ  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

13 नवम्बर 2025

झाबुआ

झाबुआ (ऋतिक विश्वकर्मा)। जिले के रामा ब्लॉक के माछलिया में संचालित सीनियर बालिका छात्रावास… जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित… और अब गंभीर आरोपों के घेरे में।

बालिकाओं के खाते में शासन द्वारा भेजी जाने वाली राशि… पूरी की पूरी… हॉस्टल अधीक्षिका द्वारा नगद आहरण करवा ली जाती है… बच्चियों को न जानकारी… न हिसाब…

संकुल प्राचार्य का बेटा हॉस्टल में बैठकर करता है आहरण…
सबसे चौंकाने वाली बात… हॉस्टल में बैठकर पैसा निकालने का काम किसी अधिकृत कर्मचारी का नहीं… बल्कि संकुल प्राचार्य वसुनिया के बेटे का…
जब प्राचार्य से पूछा गया कि उनका बेटा क्या काम करता है… जवाब मिला… कुछ नहीं… बेरोजगार है… घर पर रहता है…
लेकिन जब उन्हें फोटो और वीडियो के बारे में बाेला गया जिनमें उनका बेटा छात्रावास में बैठा दिखाई दिया… तो जवाब बदल गया…
कहा… हाेस्टल अधिक्षिका ने बुलाया था… बच्चियों के खातों से पैसे निकालकर मेडम के खाते में डालने के लिए…
जब पूछा गया कि यह आपके निर्देश पर होता है… तो बोले… नहीं… मैंने मौखिक भी नहीं कहा… न लिखित… यह सब मेडम ही कराती हैं…

हॉस्टल में बिना अनुमति पुरुष प्रवेश वर्जित… फिर यह पुरुष अंदर कैसे आया…?

बालिका छात्रावासों के नियम साफ कहते हैं… बिना अनुमति किसी भी पुरुष का छात्रावास परिसर में प्रवेश वर्जित है…
ये सुरक्षा का मूल नियम है… ताकि बालिकाओं की सुरक्षा और निजता से कोई समझौता न हो…
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही…
यह पुरुष छात्रावास में कैसे आया… किसकी विशेष अनुमति से…?
अधिक्षिका ने बुलाया… या किसी “ऊपर” के निर्देश से…
यह अब सबसे गंभीर संदेह का विषय है…

अधिक्षिका सविता भूरिया से सवाल… और चौंकाने वाले जवाब…
जब अधीक्षिका सविता भूरिया से पूछा गया कि प्राचार्य का बेटा हॉस्टल में क्या कर रहा था… पहले तो उन्होंने बात करना उचित नहीं समझा…
फोन काटना… बार-बार कॉल रिजेक्ट करना…
कुछ देर बाद जब बात हुई, तो जवाब मिला… क्या करना आपकाे… कौन आया… क्यों आया… आपको क्या मतलब…
जब कहा गया कि वह पुरुष है और संकुल प्राचार्य वसुनिया जी का बेटा है जाे छात्रावास में बैठा है… और सूत्रों के अनुसार बालिकाओं के खाते से पैसा निकालकर आपको दे रहा था…
तो बोलीं… हां तो… कर दिया… मैं जो चाहूं वह करूं… आप होते कौन हैं पूछने वाले…
जब पूछा कि बच्चियों की खाते की राशि आप क्यों आहरित करवा रही हैं… तो बोलीं… बच्चियों के खातों में आई राशि खर्चा करने के लिए निकाल ली… इकट्ठा करने का मामला था…
जब पूछा किसके निर्देश पर… तो बोलीं… कोई भी हो… विभाग का अधिकारी ही बोलेगा… बाहर वाला नहीं…
और फिर धमकी भरा लहजा…
खबर लगाने पर बोलीं… मेरी हाय बला लगेगी…
और फिर कहा… आप नेताओं को परेशान करो… वे भ्रष्ट हैं… मेरे बारे में मत छापना…

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि… 'ऊपर के निर्देश' कौन हैं…?
अधिक्षिका ने खुद कहा… ऊपर के सभी अधिकारी का कहना मानें या नहीं… आप समझ जाओ… कौन होगा…
अब सवाल यही… यह 'ऊपर' कौन है…? विभाग का कौन अधिकारी इस खेल को चला रहा है…?

बच्चियों की सरकारी राशि… और सालों से जारी अवैध प्रणाली…
सूत्र बताते हैं… यह काम आज नहीं… न जाने कब से चल रहा है…
किस साल से… किस-किस हॉस्टल में… किन-किन बच्चियों के पैसे आहरण हुए… किस-किस के खाते खाली किए गए…
साफ है… सिस्टम में कहीं न कहीं गहरी सांठगांठ…
और सबसे बड़ा शिकार… जनजातीय बालिकाएं…

सहायक आयुक्त का कहना है..
इस मामले के संज्ञान में आने पर सहायक आयुक्त सुप्रिया बिसेन ने कहा कि आपके द्वारा प्रस्तुत जानकारी संज्ञान में लाई गई है। उचित और त्वरित जांच की जाएगी। मैं इस मामले में सच्चाई जानकर कार्रवाई करूँगी।

श्रीमति सुप्रिया बिसेन, सहायक आयुक्त 

जनजातीय कार्य विभाग, झाबुआ

माछलिया छात्रावास का यह मामला अब गंभीर जांच के याेग्य है… क्योंकि यहां सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं... बल्कि बालिकाओं के भविष्य और उनके हक और अधिकाराें पर सीधी चोट है…

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