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PWD में रिश्वत का रैकेट फूटा… इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी मार… इंजीनियर 2.5 लाख लेते रंगे हाथ दबोचे गए…

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✍️ संवाददाता: इंदाैर  |  🖊️ संपादन: MP जनमत

21 अप्रैल 2026

इंदाैर

✍️ अरविंद आर. तिवारी | एमपी जनमत


इंदौर। लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं… इसका बड़ा खुलासा लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आया है… जहां करोड़ों के सड़क प्रोजेक्ट के भुगतान के बदले इंजीनियरों ने खुलेआम रिश्वत की डिमांड कर डाली… लेकिन इस बार खेल उल्टा पड़ गया… और लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर दो अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ लिया…


शिकायतकर्ता धार जिले के ठेकेदार राजपाल सिंह पंवार ने लोकायुक्त को बताया था कि उनकी फर्म द्वारा करोड़ों रुपये का सड़क निर्माण कार्य पूरा करने के बाद भी अंतिम बिल अटका दिया गया… और भुगतान के एवज में मोटी रकम मांगी जा रही है… जांच में शिकायत सही पाई गई तो लोकायुक्त ने तुरंत ट्रैप प्लान किया…


21 अप्रैल 2026 को जैसे ही रिश्वत का पैसा हाथों में आया… वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने शिकंजा कस दिया… कार्यपालन यंत्री जयदेव गौतम को उनके शासकीय निवास से 1 लाख 50 हजार रुपये लेते हुए दबोचा गया… वहीं अनुविभागीय अधिकारी टी.के. जैन को उनके ऑफिस परिसर से 1 लाख रुपये लेते समय रंगे हाथ पकड़ा गया… पूरी कार्रवाई इतनी सटीक रही कि आरोपियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला…


इस पूरे मामले में उपयंत्री अंशु दुबे का नाम भी सामने आया है… जिसने रिश्वत की मांग तो की थी… लेकिन तय रकम कम होने के चलते भुगतान नहीं लिया गया… अब लोकायुक्त पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है…


बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने करीब 4 करोड़ 73 लाख रुपये का सड़क निर्माण कार्य लिया था… जिसे लगभग 4 करोड़ 51 लाख रुपये में पूरा कर दिया गया… लेकिन अंतिम भुगतान के लिए अधिकारियों ने रिश्वत को ही “एंट्री फीस” बना दिया… और यहीं से उनका खेल खत्म हो गया…

             महानिदेशक योगेश देशमुख और डीआईजी मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है… आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 और बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है…

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